
के. रवि (दादा)
सोलापुर: महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के मालिनगर (तालुका माळशिरस) के जयसिंहनगर निवासी एक 21 वर्षीय दिव्यांग युवक ने मालिनगर ग्राम पंचायत से रहने के लिए जमीन और घर (घरकुल) की मांग की थी। लेकिन, ग्राम पंचायत ने यह कहते हुए उसे बार-बार वापस भेज देकर कहते रहे कि गाँव में जमीन ही उपलब्ध नहीं है ?
दुर्भाग्य से, कुछ दिन पहले ही इस दिव्यांग युवक का निधन हो गया और उसका अपना घर देखने का सपना अधूरा ही रह गया; अंततः प्रकृति ने ही उसे अपने ‘स्वर्गीय घर’ में बुला लिया।
इस घटना के बाद पूरे माळशिरस तालुका सहित पूरे जिले में शोक की लहर है।
करण भारत करडे (आयु 22 वर्ष) नाम का यह दिव्यांग युवक अपनी मां मनीषा करडे और पिता भारत करडे के साथ रहता था।
यह परिवार कई वर्षों से किराए के कमरे में ही रह रहा था। करण की बहुत इच्छा थी कि उसका अपना एक घर हो। उसके माता-पिता ने 10 नवंबर 2023 को पंचायत समिति माळशिरस के गट विकास अधिकारी और तहसीलदार के पास मालिनगर में जमीन उपलब्ध कराने के लिए आवेदन किया था। लेकिन, वहां से कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने के कारण, जैसे ‘जरूरतमंद गरीब का कोई सहारा नहीं होता’, वही स्थिति करण करडे के परिवार के साथ हुई।
अब करडे परिवार को अपना एकलौता बेटा खोना पड़ा है। इस मामले में विजयसिंह मोहिते पाटिल बहुउद्देशीय दिव्यांग संगठन के अध्यक्ष शहाजीराव माने देशमुख और प्रहार संगठन के तालुका अध्यक्ष गोरख मारुति जानकर ने मालिनगर ग्राम पंचायत से चर्चा भी की थी कि वे करडे परिवार को जमीन उपलब्ध कराकर उनका सपना साकार करें।
वैसे करण 95 प्रतिशत दिव्यांग था, इसलिए उसकी सारी सेवा उसकी मां को ही करनी पड़ती थी। लोकतंत्र को जीवित रखने के लिए करण करडे हर चुनाव में अपनी मां की गोद में बैठकर मतदान केंद्र जाता था और मतदान करता था। उस समय वहां मतदान केन्द्र पर उपस्थित नेताओं ने उसे आश्वासन दिया था कि, “हम तुम्हें जमीन देंगे और घरकुल मंजूर कराएंगे।
आज वह प्रकृति में विलीन हो गया, फिर भी उसे स्वतंत्र घर के लिए जमीन नहीं मिल सकी।
इन्हीं कारणों से करण करडे का घर का सपना अधूरा ही रह गया।
वैसे हक़ीक़त में देखा जाए तो , मेरे जैसे मशहूर सामाजिक बंदे को भी पचास साल हो जाते हैं और मुंबई जैसे शहर में ख़ुद का घर नही मिलता है । मुझ जैसे सई लोगों को पता भी चलता है कि घर कैसे हासिल किया जाए । सरकार कईयों को घर देती है , पर शायद वो ज़रूरतमंदों को घर नहीं मिलता । ये हमारी पीड़ा है हमारे साथ ही दफ़न होगी !
