
वी बी माणिक
मुंबई देश की राजधानी दिल्ली में सबसे शर्मनाक घटना का आखिर में पटाक्षेप हो गया अखिर में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को दबाव के कारण पद से इस्तीफा देना पड़ा उनकी जगह प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्री का अतिरिक्त कारभार सौप दिया गया और नीट पेपर लीक मुद्दे को लेकर चल रहे धरना प्रदर्शन आंदोलन को कल केंद्रीय मंत्री जेपी नडा और जितेंद्र सिंह ने इनकी तीनों मांगों पर विचार करने आशवासन देकर समाप्त करवाने में सफल रहे पर देश के अराजकतत्वों द्वारा इस आंदोलन को हाईजैक कर पुलिसकर्मियों पत्रकारों को मारा पीटा गया इस पर कोई भी राजनीतिक दल के नेता मुँह खोलने को तैयार नहीं हुआ कि इसमें शामिल किस पार्टी के गुंडों ने मारपीट कर रहे थे छात्र छात्राओं के इस आंदोलन में बिना बुलाये अप्रिय घटनाओं को अंजाम दिया गया और इसमें शामिल होकर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया नागरिको का कहना है कि राहुल गांधी अरविंद केजरीवाल अखिलेश यादव डिम्पल यादव सुप्रिया सुले राकेश टिकैत के समर्थक इस आंदोलन को हिंसक बना दिया कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में चले इस आंदोलन के नेता सोनम वांगचुक द्वारा 25 दिनों तक भूख हड़ताल पर जाने के बाद इनकी हालत बिगड़ गयी पर वही इन्हीं के दूसरे नेता बाहर से खाना मंगा कर अपनी पेट पूजा करने में व्यस्त थे ऐसा लगा कि ये छात्रों का आंदोलन नहीं किसी पार्टी की सत्रहवीं चल रही थी फिर यह आंदोलन हिंसात्मक हो गया पर केंद्रीय मंत्री ने तो इस्तीफा दे दिया वही पंजाब कर्नाटक केरल में जो पेपर लीक हुआ उस पर इस्तीफा कौन मांगेगा इस पर कार्रवाई कौन करेगा य़ह बड़ा प्रश्न है जनमानस का कहना है कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था पहले इसकी जांच किसी सेंट्रल एजेंसी से करवाना चाहिए था ये आंदोलनकारीयों की सख्त जाँच की जानी चाहिये और इसके बाद कोई निर्णय लेने की जरूरत थी सिजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने पत्रकार परिषद में आरोप लगाया कि इस आंदोलन में बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरस स के गुंडों ने मारपीट कर पूरे माहौल को बिगाड़ दिया इसकी जाँच सरकार कब करवा कर सौरव को कानून के दायरे में खड़ा करेगी जिससे सच्चाइयों को सामने लाकर देश के समक्ष पेश किया जाना चाहिए जो भी राजनीतिक दल इसमें दोषी मिले उस पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि देश में जो अस्थिरता पैदा हो रही है उससे आम नागरिक त्रस्त है इनको कोई मुआवजा नहीं देना चाहिए और जो एफआईआर दर्ज किया गया है उसको वापस नहीं लिया जाना चाहिए अगर सरकार करेगी तो गलत होगा
