
सैय्यद जाहिद अली रियासत
मुंबई के झोपड़पट्टी परिसरों में रहने वाले गरीब, मेहनतकश, वंचित, शोषित, पिछड़े वर्ग तथा विभिन्न राज्यों से रोजगार के लिए मुंबई आए लाखों परिवारों के आश्रय के प्रश्न को शासन केवल अवैध निर्माण का विषय मानकर न देखे, बल्कि मानवीय, सामाजिक और पुनर्वास के दृष्टिकोण से विचार करे, ऐसी मांग सामाजिक कार्यकर्ता संजय रमेश भालेराव ने की है।
मुंबई की कई झोपड़पट्टियों में नागरिक पिछले 50 से 60 वर्षों से रह रहे हैं। समय के साथ उनके परिवारों की संख्या बढ़ी, बच्चों के विवाह हुए, नई पीढ़ियां वहीं रहने लगीं; परंतु मुंबई में जमीन की कमी और घरों की बढ़ती कीमतों के कारण गरीब परिवारों के लिए स्वतंत्र आवास लेना संभव नहीं हो पाया है।
परिणामस्वरूप कई परिवारों ने उपलब्ध बेहद कम जगह में अपनी झोपड़ी के ऊपर एक अतिरिक्त मंजिल या मचान बनाकर परिवार के रहने की व्यवस्था की है। ऐसे निर्माणों पर केवल ऊंचाई के कारण तुरंत तोड़क कार्रवाई करने के बजाय शासन और बृहन्मुंबई महानगरपालिका द्वारा इस पूरे प्रश्न पर सामाजिक वास्तविकता के आधार पर पुनर्विचार करना आवश्यक है।
उन्होंने पीड़ितों की प्रमुख मांगें प्रशासन के सामने रख्खी हैं जो निम्नलिखित है_
1. मुंबई की झोपड़पट्टियों में 14 फीट से 18 फीट ऊंचाई तक के मौजूदा निर्माणों पर तोड़क कार्रवाई तत्काल स्थगित की जाए।
2. ऐसे निर्माणों का विशेषज्ञ इंजीनियरों के माध्यम से स्ट्रक्चरल ऑडिट और अग्नि सुरक्षा जांच कराकर मानवीय व सामाजिक दृष्टिकोण से संरक्षण देने के संबंध में विशेष नीति तैयार की जाए।
3. आवश्यक सुरक्षा मानदंड, निर्माण की मजबूती, अग्नि सुरक्षा, प्रकाश-हवा, रास्ते/गली की उपलब्ध चौड़ाई और आपातकालीन प्रवेश का विचार कर झोपड़पट्टियों के लिए अधिकतम ऊंचाई सीमा 22 फीट तक करने की व्यवहार्यता की शासन द्वारा जांच की जाए।
4. कई दशकों से अस्तित्व में मौजूद और प्रत्यक्ष रूप से आवासीय उपयोग में आ रहे निर्माणों के लिए स्वतंत्र नियमितीकरण या संरक्षण योजना तैयार की जाए।
5. कोई भी तोड़क कार्रवाई करने से पहले संबंधित परिवारों को उचित नोटिस, व्यक्तिगत सुनवाई और उपलब्ध दस्तावेज प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर दिया जाए।
6. पुनर्विकास क्षेत्रों में ऊपरी मंजिल पर रहने वाले वास्तविक निवासियों का सर्वेक्षण व पुनर्वास करने की जो प्रक्रिया विभिन्न परियोजनाओं में चलाई जा रही है, उसी तर्ज पर मुंबई की अन्य झोपड़पट्टियों में रहने वाले वास्तविक निवासी परिवारों के प्रश्न पर भी शासन द्वारा स्वतंत्र रूप से विचार किया जाए।
आश्रय एक बुनियादी सामाजिक आवश्यकता है
गरीबों को केवल आर्थिक सहायता देने के साथ-साथ उनके सुरक्षित और स्थायी आश्रय के प्रश्न को प्राथमिकता देना आवश्यक है। बढ़ते परिवारों को उपलब्ध जगह में सुरक्षित रूप से रह सकने के लिए आज मुंबई को एक यथार्थवादी नीति की आवश्यकता है।
यदि गरीब नागरिकों ने आर्थिक परिस्थितियों के कारण अपनी छोटी सी झोपड़ी पर परिवार के लिए अतिरिक्त आवास व्यवस्था की है, तो उस पर सीधे बुलडोजर चलाना पहला विकल्प नहीं होना चाहिए। पहले नियमितीकरण की संभावना, सुरक्षा उपाय, पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार होना चाहिए।
“सरकार आपके द्वार” की संकल्पना को सही मायने में सफल करना है, तो शासन को मुंबई के गरीब नागरिकों के घर के प्रश्न की ओर संवेदनशीलता से देखना चाहिए।
इसलिए महाराष्ट्र शासन, नगर विकास विभाग और बृहन्मुंबई महानगरपालिका द्वारा संयुक्त रूप से अध्ययन कर मुंबई की झोपड़पट्टियों में मौजूदा 14 से 18 फीट ऊंचाई वाले आवासीय निर्माणों पर तोड़क कार्रवाई पर अस्थायी रोक लगाई जाए और सुरक्षा शर्तों के साथ 22 फीट तक ऊंचाई को अनुमति/नियमितीकरण देने के संबंध में विशेष नीति तैयार की जाए, ऐसी मांग भालेराव ने की है।
