
वी बी माणिक
मुंबई। रेलवे के लोहमार्ग पुलिस के महासंचालक प्रशांत बुर डे। कल 30 सितंबर को सेवा निवृत हो गए इनके जाने से लोहमार्ग पुलिस में अधिकांश कर्मियों ने खुशी मनाया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इनके कार्यकाल में गलत कार्यों को प्रोत्साहन दिया जाते जाते बोरीवली स्टेशन पर अमली पदार्थ के साथ एक व्यक्ति को पकड़ा गया जिसको छोड़ने के लिए किसका आदेश था और उस पर बोरीवली जीआरपी ने केस बनाकर उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया इसके साथ 2 लाख 40 हजार का लेनदेन किसने किया उसके 2 कर्मियों को सस्पेंड किया गया और 5 पुलिस कर्मियों की जाँच किया जा रहा है इसकी जानकारी कोई रिटायर्ड पुलिस अधिकारी ने प्रशांत बुरडे को दिया बिना किसी जाँच के कुछ भी कार्रवाई करना ये बुरडे के कार्यकाल में जमकर किया गया इसके साथ ही बुरडे के कार्यालय में 12 से 15 वर्षों से कार्यरत पुलिस कर्मियों का ट्रांसफर भी नहीं होने दिया और आजतक इन पुलिसकर्मियों का ट्रांसफर नहीं हुआ इसके अलावा किसी भी शिकायत का उत्तर भी नहीं मिलता 6 6 महीने से शिकायत कर्ता डीजी रेलवे के कार्यालय में चक्कर लगाते रहे पर कोई उत्तर नहीं मिला ये अपने कुछ चाटुकारो से ही मिलते थे अगर देखा जाय तो बुरडे ने लोहमार्ग पुलिस का सत्यानाश ही किया इनका स्टाफ लापरवाही और कामचोरी में ही व्यस्त रहा आगे जो भी इनकी जगह अधिकारी आयेगा उसको सुधार करने की ज्यादा आवश्यकता होगी अगर सुधार नहीं किया तो लोहमार्ग पुलिस में बड़ा भ्रष्टाचार होने का खुलासा होगा बुरडे को महाराष्ट्र का महा संचालक होना था पर राज्य सरकार ने इनके कार्य को देखते हुए इनकी जगह सदानंद दाते को महासंचालक का पदभार सौंप दिया और प्रशांत को रेलवे का डीजी बना दिया इससे बड़े शर्मनाक क्या हो सकता है बुरडे पुलिस कर्मियों के ट्रांसफर पर सेवा लेते थे जिससे पुलिस कर्मियों में भारी रोष व्याप्त था सबसे बड़ी बात तो यह है गणेशोत्सव की ड्यूटी कर रहे 180 पुलिसकर्मियों को हटाकर इनके परेड में शामिल कर दिया गया क्योंकि इनके इतने अच्छे कार्य थे गणेश भक्तों की सुरक्षा की कोई महत्व नहीं दिया गया वही लालबाग के राजा के दर्शन के लिए बहुत सारे पुलिस अधिकारी वंचित रह गए बहुत सारे पुलिस कर्मी इनके रवैये से परेशान थे
वहीं दूसरी ओर पुलिस आयुक्त राकेश क्लासगर इतिहास खड़ा कर रहे है सभी पुलिस कर्मियों के दुख दर्द को सुनकर उनका सहयोग कर रहे है इनके कार्यकाल में 6 नए पुलिस स्टेशन भी खुल गए अपराध को रोकने के लिए प्रतिदिन सभी वरिष्ठ पुलिस निरीक्षको की क्लास लेते है जिसकी शिकायत पाते हैं उस पर कार्रवाई करते है उस पर भी डीजी हस्तक्षेप करते हैं अब तो पुलिस कर्मियों में दबी जुबान से चर्चा चल रही है कि रेलवे में मराठी आईपीएस की जरूरत नहीं है अन्य राज्य के आईपीएस अधिकारी अच्छा कार्य करते है और सहयोग करते है अब देखना होगा कि डीजी रेलवे के पद पर किसको बिठाया जाता है
