
के. रविदादा
मुंबई: मुंबई उच्च न्यायालय ने चेंबूर के सिद्धार्थ नगर स्लम के कुछ झोपड़ीधारकों को, ‘रुपारेल बिल्डकॉन’ की डेवलपर के रूप में हुई नियुक्ति को झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (SRA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) या उचित कानूनी मंच के समक्ष चुनौती देने की अनुमति दे दी है।
इस मामले से जुड़ी मुख्य बातें यह है की मुंबई उच्च न्यायालय के न्याय मूर्ति आदरणीय . गिरीश कुलकर्णी और आदरणीय न्यायमूर्ति डॉ. नीला गोखले की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यदि एसआरए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने जांच के बाद ‘रुपारेल बिल्डकॉन’ को हटाना आवश्यक समझा, तो नए बिल्डर की नियुक्ति का निर्णय राज्य सरकार को भेजा जाना चाहिए।
साथ ही, माननीय न्यायालय ने एकल नियुक्ति पर रोक लगाते हुए एसआरए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि यहाँ की 33 सोसायटियों में से कोई भी एक सोसायटी या उनका फेडरेशन स्वयं स्वतंत्र रूप से किसी नए डेवलपर (बिल्डर) की नियुक्ति नहीं कर सकेगा।इस प्रोजेक्ट की पृष्ठभूमि कुछ ऐसी है कि मुंबई
पिन कोड क्रमांक 400071, के.एन. गायकवाड़ मार्ग, चेंबूर सिद्धार्थ नगर कॉलोनी (सेंट्रल), जो कि 66,000 वर्ग मीटर की सरकारी जमीन पर होने वाला यह सिद्धार्थ नगर पुनर्वसन प्रोजेक्ट साल 2006 से लंबित रहा है। इस प्रोजेक्ट के लिए आगे आए अरुण रुपारेल की ‘रुपारेल बिल्डकॉन’ को मार्च 2021 में मंजूरी मिली थी और अगस्त 2021 में लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) जारी किया गया था। हालांकि, इस फेडरेशन की सहमति प्रक्रिया पर झोपड़ीधारकों ने इसपर आपत्ति जताई थीं ?
हालाँकि एसआरए के सचिव ने 4 फरवरी 2026 को रुपारेल के पक्ष में जारी लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) को स्थगित कर दिया था और अगली परमिशन पर रोक लगा दी थी। इस स्थगन के खिलाफ ‘रुपारेल बिल्डकॉन’ ने मुंबई उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए अभी
अदालत ने चेंबुर सिद्धार्थ नगर के झोपड़ीधारकों को रुपारेल बिल्डर की नियुक्ति को चुनौती देने की अनुमति दे दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि एसआरए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को रुपारेल बिल्डर को हटाना आवश्यक लगता है, तो नियमानुसार (DCPR 33(10)) इस पुनर्वसन प्रोजेक्ट को राज्य सरकार द्वारा अपने कब्जे में लेकर नया डेवलपर (बिल्डर) नियुक्त करने का अधिकार है।
रुपारेल बिल्डर द्वारा मिठाईयां बाटी गई :
विशेष रूप से, 20 वर्षों से अटके चेंबूर सिद्धार्थ नगर के सरकारी जमीन पर स्थित इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 2006 में हुई थी। यहाँ कुल 1,520 पात्र निवासियों में से 823 निवासियों की सहमति पर ‘रुपारेल’ डेवलपर की नियुक्ति हुई थी। परंतु सिद्धार्थ नगर के निवासियों ने इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताई थी।
एसआरए और डेवलपर के बीच विवाद से बचने के लिए, सरकार ने टिप्पणी की के सरकारी जमीन पर इस तरह की परियोजनाओं को राज्य सरकार या सार्वजनिक प्राधिकरणों द्वारा स्वयं अपने हाथ में लिया जाना चाहिए। पर ना जाने किसी अंदरूनी ख़ुशी से ख़ुश होकर , किसी विशेष कारण से ‘रुपारेल बिल्डकॉन’ के डेवलपर ने चेंबूर सिद्धार्थ नगर कॉलोनी परिसर में बड़े पैमाने पर मिठाई यां बांटी।
