जितेंद्र साळुंखे
आनंद दुबे और बाबूभाई भवानजी को पार्टी में शामिल कर हिंदी भाषी और गुजराती समाज को भी साथ लाने की कोशिश
*मुंबई: महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री और शिवसेना के मुख्य नेता एकनाथ शिंदे ठाणे की तरह मुंबई को भी पार्टी का अभेद दुर्ग बनाना चाहते हैं। इसके लिए लगातार पार्टी का आधार बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।*
*बता दें कि हाल ही में श्री शिंदे ने बड़े हिंदी भाषी नेता और शिवसेना यूबीटी के प्रवक्ता आनंद दुबे को पार्टी में शामिल कर लिया। मुंबई में हिंदी भाषी लोगों की संख्या बहुत अधिक है और दुबे को पार्टी में शामिल कर उन्होंने हिंदी भाषी लोगों को एक सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की है।*
*इसी प्रकार कुछ समय पूर्व उन्होंने मुंबई के पूर्व उप महापौर बाबू भाई भवानजी को भी पार्टी में शामिल किया था। बाबू भाई मुंबई के बहुत वरिष्ठ नेता हैं। वे चार बार नगरसेवक और मुंबई के उप महापौर रह चुके हैं। गुजराती समाज, व्यापारी वर्ग और हॉकर्स पर उनकी बहुत मजबूत पकड़ मानी जाती है।*
*शिंदे गुजराती और हिंदी भाषी समाज को साथ लेकर शिवसेना का आधार बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। यदि उनके मराठी समाज के साथ साथ हिंदी भाषी ओर गुजराती समाज भी शिवसेना से जुड़ जाता है तो ठाणे की तरह मुंबई भी शिवसेना का अभेद दुर्ग बन जाएगा और शिंदे इसी मिशन पर काम कर रहे हैं।*
(*(उधर एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे गुट (उबाठा) पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें ‘वोट डकैत’ करार दिया।)*)
*मंगलवार को मुंबई के नेस्को में आयोजित शिवसेना की दशहरा रैली को संबोधित करते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा-शिवसेना गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलने के बावजूद उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर सरकार बनाई और जनादेश के साथ विश्वासघात किया। शिंदे ने कहा कि उद्धव का मुख्यमंत्री पद के लिए कांग्रेस के साथ जाना ही महाराष्ट्र में सबसे बड़ी ‘वोट चोरी’ थी।*
*शिवसेना के हीरक महोत्सवी दशहरा रैली को संबोधित करते हुए शिंदे ने कांग्रेस, उद्धव ठाकरे गुट और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने विपक्ष पर चुनाव आयोग के खिलाफ राजनीति करने, युवाओं को भड़काने और देश में अशांति का माहौल बनाने का आरोप भी लगाया। शिंदे ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कि कांग्रेस ने 70 साल तक देश को लूटा।*
*अपने भाषण में एकनाथ शिंदे ने सूखे से प्रभावित किसानों की मदद को प्रमुखता देते हुए कहा कि यह समय राजनीति करने का नहीं, बल्कि संकट में घिरे किसानों के साथ खड़े होने का है। उन्होंने बताया कि शिवसेना की ओर से प्रभावित क्षेत्रों के किसानों के लिए दिवाली के राशन से भरे 100 ट्रक रवाना किए गए हैं। उन्होंने आगे भी सैकड़ों ट्रक सहायता सामग्री भेजने का भरोसा दिलाया। शिंदे ने कहा, “हम किसानों की दिवाली काली नहीं होने देंगे। आप हमें रोज गालियां दीजिए, लेकिन हम किसानों को राशन देकर उनकी दिवाली मीठी बनाएंगे।*
*हम केवल भाषण देने वाले नहीं, बल्कि किसानों के घर का चूल्हा जलाने वाले लोग हैं।” विपक्ष की ओर से किसानों को दी जा रही आर्थिक सहायता पर सवाल उठाए जाने के जवाब में शिंदे ने कहा कि संकट के समय किसानों की मदद के लिए आगे आने के लिए बड़ा दिल और हिम्मत चाहिए। उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि क्या उसने किसानों को बिस्कुट का एक पैकेट भी दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य की तिजोरी पर किसानों का पहला अधिकार है और किसानों के हितों की रक्षा के लिए वह हमेशा उनके साथ खड़े रहेंगे।*
(*(शिंदे ने शिवसैनिकों और पदाधिकारियों से भी किसानों के घर और खेतों तक पहुंचकर उन्हें भरोसा देने और हर संभव सहायता करने की अपील की।)*)
(*(शिंदे ने विपक्ष की ओर से ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता व्यवस्था बदलने की मांग पर भी सवाल उठाए)*)
*उन्होंने कहा कि जो लोग व्यवस्था बदलने की बात कर रहे हैं, उन्हें पहले अपने राजनीतिक दलों में हुए बदलावों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि जनता विपक्ष को कई बार नकार चुकी है। आपातकाल का उल्लेख करते हुए शिंदे ने कहा कि उस समय पत्रकारों की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध थे और न्यायपालिका पर दबाव था, जबकि आज देश में विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक आंदोलन हो रहे हैं। उनके मुताबिक, इसे आपातकाल नहीं, बल्कि लोकतंत्र की अभिव्यक्ति के रूप में देखा जाना चाहिए।*
*प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विपक्ष की टिप्पणियों का जवाब देते हुए शिंदे ने कहा कि प्रधानमंत्री को विभिन्न देशों से सम्मान मिला है और वह देश के विकास के लिए लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष पर प्रधानमंत्री के खिलाफ निम्न स्तर की भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। शिंदे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्ष की बयानबाजी पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष की राजनीति देश में विभाजन और अशांति को बढ़ावा दे रही है।*
*कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए शिंदे ने आरोप लगाया कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर देश की संस्थागत व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि संविधान का उल्लेख करने वाले नेताओं को संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान भी करना चाहिए।*
*अपने लंदन दौरे का जिक्र करते हुए शिंदे ने कहा कि उन्होंने वहां मराठी भाषा, छत्रपति शिवाजी महाराज के गौरव और महाराष्ट्र के विकास की बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे गुट को उनके इस दौरे से भी परेशानी हुई। शिंदे ने तंज कसते हुए कहा कि वह गांव जाएं, दिल्ली जाएं या लंदन, विपक्ष को हर बार परेशानी होती है। उनके अनुसार, महाराष्ट्र के विकास और मराठी अस्मिता को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना गर्व की बात है।*
*शिंदे ने कैप्टन स्मित मच्छार का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर 174 लोगों की जान बचाई। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने उनके साहस की सराहना नहीं की, जबकि उनके कार्य की दुनिया भर में प्रशंसा हुई। शिंदे ने विपक्ष पर देशभक्ति के मुद्दे पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि देश की सुरक्षा तथा बहादुरी के कार्यों को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।* *युवाओं को भड़काने की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि युवाओं को आंदोलन की राजनीति में उलझाने के बजाय उनके उज्ज्वल भविष्य पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने गढ़चिरौली में कौशल विकास केंद्र की स्थापना का उल्लेख करते हुए दावा किया कि वहां हर साल लगभग 5,000 युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार, कौशल और विकास के अवसर देना ही सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।*
*शिंदे ने बताया कि किसानों के परिवारों की सहायता के लिए शिवसेना की ओर से कई योजनाएं शुरू की गई हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की पत्नियों को 25 हजार सिलाई मशीनें वितरित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके अलावा, किसान परिवारों की बेटियों को स्कूल जाने में सुविधा देने के लिए 25 हजार साइकिलें वितरित करने की पहल की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन किसान परिवारों की बेटियों के विवाह तय हैं, उनके विवाह में सहायता करने का संकल्प पार्टी ने लिया है।*
अपने संबोधन के अंत में शिंदे ने शिवसेना के संगठनात्मक विस्तार का उल्लेख करते हुए पार्टी के सांसदों, विधायकों और स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों की संख्या गिनाई। उन्होंने कहा कि पार्टी की ताकत उसके कार्यकर्ता हैं और संकट के समय लोगों की मदद करना ही संगठन की असली पहचान है। शिंदे ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे और आनंद दिघे की विचारधारा भी संकटग्रस्त लोगों की मदद करने की रही है। उन्होंने शिवसैनिकों से किसानों के बीच जाकर उनका मनोबल बढ़ाने और सहायता पहुंचाने का आह्वान किया।*

